IPO ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) क्या होता है: जानिए ग्रे मार्केट प्रीमियम और कैसे होती है इसमें ट्रेडिंग

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जब कोई आईपीओ बाजार में आता है तो GMP की काफी चर्चा होने लगती है। आईपीओ के लांच होने से लेकर शेयरों की लिस्टिंग तक GMP पर सबकी निगाहें रहती हैं। आपने भी कई बार खबरों में ग्रे मार्केट के बारे में पढ़ा सुना होगा। खासकर कोई चर्चित आईपीओ बाजार में आने लगता है। तो ग्रे मार्केट और GMP जैसे शब्दों का हमारा सामना बार-बार होता है तो आज हम IPO ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) क्या होता है, इससे जुड़े आपके सवालों के जवाब देने वाले हैं।

क्या है ग्रे मार्केट ?

ग्रे मार्केट एक अनऑफिशियल और अनरेगुलेटेड बाजार है, जहां शेयरों का कारोबार एक्सचेंजो पर लिस्ट होने से पहले किया जाता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) एक्सचेंज पर ट्रेडिंग के विपरीत ग्रे मार्केट में ट्रेडिंग व्यक्तिगत रूप से होती है। ऐसी ट्रेडिंग नियामक दायरे से बाहर होती है, हालांकि उन्हें अवैध नहीं माना जाता है। IPO ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) क्या होता है में बता दें कि, इस बाजार में लेनदेन व्यक्तिगत रूप से होते हैं।

IPO ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) क्या होता है

ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) वो अतिरिक्त कीमत है, जिसे इन्वेस्टर्स शेयर के स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने से पहले ग्रे मार्केट में भुगतान करने के लिए तैयार होते हैं। IPO ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) क्या होता है, इसमें बता दें कि स्टॉक को ग्रे मार्केट में ट्रेडर्स के बीच आपसी विश्वास के आधार पर ट्रेड किया जाता है। जैसे कि अगर आईपीओ के लिए इश्यू प्राइस 500 रुपए प्रति शेयर है और स्टॉक ग्रे मार्केट में 520 रुपए पर टिकट कर रहा है तो आईपीओ का GMP 20 रुपए होगा।

कैसे होता है ट्रेड ग्रे मार्केट में ?

ग्रे मार्केट को मानक भाषा में पैरलल मार्केट भी कह सकते हैं, क्योंकि यह शेयर बाजार के समानांतर काम करता है। इसे अनऑफिशियल स्टॉक मार्केट भी कह दिया जाता है। शेयर मार्केट में किसी भी शेयर के ऑफिशियल रूप से शुरुआत करने के पहले ही इस मार्केट में उनका ट्रेड शुरू हो जाता है। IPO ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) क्या होता है में बता दें कि, शेयर मार्केट ट्रेडिंग में खरीदार और विक्रेता का आमने-सामने होना कनेक्ट होना जरूरी होता है।

ग्रे मार्केट कैसे करता है कारोबार?

ग्रे मार्केट का कारोबार भरोसे पर चलता है। इसे ऐसे समझ सकते हैं जैसे कि कंपनी है, इसका बिजनेस काफी अच्छा चल रहा है। कंपनी ने हाल के दिनों में अच्छा फायदा भी कमाया है। IPO ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) क्या होता है, कंपनी अपना व्यापार बढ़ाने के लिए बाजार में आईपीओ लेकर आई और निवेशक की नजर कंपनी पर पड़ी उसने सोचा कि इस कंपनी का आईपीओ खरीद लेना चाहिए। मगर, पता चला कि आफरिंग के लिए अप्लाई करने की आखिरी तारीख निकल गई।

अप्लाई आफरिंग की आखिरी तारीख निकल जाने पर अब ऐसे में निवेशक अब ग्रे मार्केट का रुख करेगा। जहां अब ग्रे मार्केट में पहले से अप्लाई कर चुका निवेशक अपने हिस्से की बोली लगवा रहा है। ऐसे में दूसरा निवेशक चाहे तो पूरा का पूरा एप्लीकेशन बोली लगाकर खरीद सकता है। IPO ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) क्या होता है, ग्रे मार्केट शेयर बाजार में कारोबार शुरू होने से पहले वैल्यू का ठीक-ठाक अंदाजा दे देता है और ज्यादातर इसका अंदाजा सटीक साबित होता है।

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